मऊआइमा में सरकारी ज़मीन पर भू माफियाओं की नज़र, कब्जे और बिक्री का बड़ा खुलासा
राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट के बावजूद FIR दर्ज न होना कई सवाल खड़े करता है
प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद भी जिले में भूमाफियाओं के हौसले बेखौफ नज़र आ रहे हैं। मऊआइमा क्षेत्र से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी संपत्ति पर माफियाओं ने न सिर्फ कब्ज़ा किया, बल्कि उसे बेचने तक का प्रयास किया। यह गंभीर प्रकरण राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर उजागर हुआ है।
मऊआइमा के राजस्व अधिकारियों ने अपनी लिखित रिपोर्ट में बताया है कि खसरा संख्या 4712/1 4712/2 लोनार चार बीघा सरकारी भूमि पर कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा कब्जा व अवैध खरीद-फरोख्त की कोशिश की गई। जांच में सामने आया कि ये भूमि राजस्व अभिलेखों में सरकारी (नज़ूल) के रूप में दर्ज है, जिसके किसी भी प्रकार के विक्रय या हस्तांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध है।
राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की संयुक्त रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय भूमाफिया अपने नेटवर्क के जरिए ग्रामीणों को भ्रमित कर इन सरकारी भूखंडों को निजी बताते हुए उनकी डील कराने की कोशिश कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर राजस्व टीम ने मौके का निरीक्षण कर अपनी जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
जब जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और बिक्री का प्रयास साबित हो चुका है, तो अभी तक मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग इस पूरे खेल को संरक्षण दे रहे हैं, जिसके कारण प्रशासनिक कार्रवाई ठप पड़ी हुई है।
मऊआइमा क्षेत्र में लंबे समय से भूमाफियाओं का नेटवर्क सक्रिय माना जाता रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भूमाफियाओं पर कठोर कार्रवाई के आदेशों के बाद पूरे प्रदेश में कई बड़े माफियाओं पर प्रहार हुआ है, लेकिन मऊआइमा का यह मामला अब भी प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल FIR दर्ज कर भूमाफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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