शहीदे कूफा हज़रत अली के ग़म में इमस्जिद क़ाज़ी से ईरानी शैली का निकाला गया ताबूत

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मुदस्सिर खान प्रयागराज} शहीदे कूफा हज़रत अली के ग़म में इमस्जिद क़ाज़ी से ईरानी शैली का निकाला गया ताबूत* प्रयागराज :सन इक्सठ हिजरी को कूफे की मस्जिद मे फजिर की नमाज़ पढ़ाने के दौराना दूनिया के पहले आतंकी अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम ने ज़हर बुझी तलवार से अमीरुलमोमनीन के सर पर वार कर हालते सजदा मे ऐसा गहरा ज़ख्म दिया की ग़रीबों को रात के सन्नाटे मे घर घर जाकर दक़्क़ुलबाब कर रोटीयां पहुँचाने वाला मसीहा इक्कीसवीं रमज़ान सन साठ हिजरी को इस दुनिया से रुखसत हो गया।उसी शहीदे कूफा की याद मनाने को भोर मे मस्जिद क़ाज़ी साहब मे सियाह चादर मे लिपटी औरतें और स्याह वस्त्र पहने पुरुषों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।लोग ग़मज़दा रहकर सिसकियां लेते रहे।मस्जिद अक़ीदतमन्दों से भर गई तो मस्जिद के बाहर भी सैकड़ो लोग ज़ियारत को बेताब रहे।अज़ान सुबहो के बाद मौलाना जवादुल हैदर रिज़वी की इमामत मे बाजमात लोगों न फजिर की नमाज़ अदा की।बाद नमाज़ मस्जिद व गलीयों की स्ट्रीट लाईटों को शोक मे बन्द कर दिया गया।मौलाना रज़ी हैदर ने मसायब पढ़े तो हर तरफ से आहो बुका की सदा गूँजने लगी।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के जनरल सेक्रेटरी मिर्ज़ा अज़ादार हुसैन की सरपरस्ती मे मोमबत्ती की रौशनी व लोबान की धूनी के बीच ईरानी शैली के नक़्क़ाशीदार गहवारे मे रखा मलमल की चादर से ढ़का ताबूत मौला अली निकाला गया तो लोगों का हुजूम बोसा लेने को उमड़ पड़ा।या अली मौला हैदर मौला की सदा बुलन्द करते हुए मातमदार ताबूत के साथ साथ अहाता खुर्शैद हुसैन मरहूम तक गए जहाँ नौहा और मातम के साथ जुलूस खत्म किया गया और ताबूत के फूलों को करबला क़ब्रिस्तान मे लेजाकर सुपुर्देखाक किया गया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सैय्यद मोहम्मद अस्करी के अनुसार दो वर्ष के कोरोना बन्दीशों के बाद हो रहे कार्यक्रम की वजहा से इस वर्ष शहर के मुख्तलिफ इलाक़ो के साथ दूर दराज़ कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी अक़ीदतमन्द जुटे।क्षेत्रिय पार्षद रमीज़ अहसन व मो०ज़ाहिद नेता का मस्जिद कमेटी व जुलूस इन्तेज़ामिया कमेटी की ओर से साफ सफाई अन्य प्रकार से सहयोग करने पर धन्यवाद व आभार जताया गया। मौलाना रज़ी हैदर ,मौलाना जवादुल हैदर , मौलाना अम्मार ज़ैदी ,मौलाना डॉ रिज़वान हैदर ,फरीद रज़ा ,फरमान रज़ा ,हसनैन अख्तर ,रिज़वान जव्वादी ,मिर्जा अज़ादार हुसैन ,हुसैन रज़ा ,ज़ुलक़रनैन आब्दी ,हैदर अली ,सै०मो०अस्करी ,ज़ामिन हसन ,शजीह अब्बास ,फैज़ रज़ा ,शाहिद अब्बास रिज़वी ,फैज़याब हैदर ,अली सज्जाद ,मिर्जा दानिश ,मिर्जा शीराज़ ,मिर्ज़ा वसी हसन ,अली रज़ा ,शबीह जाफरी आदि शामिल रहे।वहीं दूसरा सबसे बड़ा जुलूस रोज़ादारों को गर्मी की शिद्दत से बचाने के लिए समय परिवर्तन करते इमामबाड़ा आज़म हुसैन ने आयोजक शुजा हैदर ,जलाल हैदर ,कमाल हैदर की क़यादत मे निकाला गया।मौलाना ज़ीशान हैदर ने इमामबाड़ा आज़म हुसैन मे मजलिस को खेताब किया।बुज़ुर्ग मर्सियाख्वान ज़ायर हुसैन नेव्हील चेयर पर बैठे बैठे जुलूस मे मर्सियाख्वानी की अहमद जावेद और क़ाज़िम अब्बास ने मर्सियाख्वानी मे साथ । अन्जुमन अब्बासिया रानीमण्डी के हमराह नौहाख्वानो ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस निकाला।अक़ीदतमन्दों ने ताबूत ए मौला अली का बोसा लेते हुए फूल माला चढ़ाकर मन्नत व मुरादें मांगी।दूसरा जुलूस आबिदया इमामबाड़े से मिर्ज़ा काज़िम अली ,हसन नक़वी ,शेरु भाई ,इशत आब्दी ,यशब आब्दी की ज़ेरे सरपरस्ती मे अन्जुमन आबिदया रानीमण्डी ने निकिला।दोनो जुलूस रानीमण्डी ,बच्चा जी धरमशाला ,डॉ चड्ढ़ा रोड ,कोतवाली ,नखास कोहना ,खुलदाबाद ,हिम्मतगंज होते हुए चकीया करबला क़ब्रिस्तान तक गया।जहाँ सभी तबर्रुक़ात पर चढ़ाए गए फूलों को नम आंखों से सुपुर्देखाक किया गया।जुलूस में मंज़र कर्रार ,गौहर काज़मी ,असग़र अब्बास ,अलमास हसन ,डॉ अबरार ,सादिक़ ,मोनू भाई ताबिश सरदार ,ज़ीशान अब्बास आदि शामिल रहे। ---------------------------- *21 रमज़ान: शहादत हज़रत अली......* *इमामबाडा हुसैन अली खान का अलम, ताबूत और ज़ुलजना जुलूस निकला* प्रयागराज :दरियाबाद के प्रसिद्व इमामबाड़ा हुसैन अली खां का 21 रमज़ान: शहादत हज़रत अली का अलम , ताबूत और ज़ुलजना की शबी का जलूस इमामबाड़े से पूरी अक़ीदत के साथ निकाला गया । इसके बाद नगर की प्रसिद्ध अंजुमन, अंजुमन ए हाशिमया ने नौहखानी और सीनाज़नी की। इस दौरान अंजुमन ए हाशिमया के साइबेबॉयज़ डेज़ी, अर्शी,यासिर सिबटेंन,खुस्तर नवाज़, फ़ैज़ी, अनदिल, मोहम्मद आदि ने नौहा पढ़ा। शायर आमिर रिज़वी का नौहा और डॉ कमर आबिदी के नौहे पर बहुत रिक्कत( रोना) हुआ। *"इस्लाम के सर पे ज़र्ब लगी ईमान का दिल दो पारा है।"* *"काबे में हुआ था जो पैदा मस्जिद में उसी को मारा है।।"* कार्यक्रम के सयोजक एवं संचालक ज़ौरेज़ हैदर ने बताया कि पुरुषों के बाद इमामबड़े के अंदर ज़ुलजना के सामने महिलाओं ने भी नौहा मातम कर के हज़रत अली को खेराजे ए अक़ीदत पेश किया। इस मौके पर नगर के गणमान्य व्यक्ति आगा

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