शहजाद खान
कोरोना वायरस महामारी के वजह से स्कूल बंद होने से भुखमरी के कगार पर पहुंचे निजी स्कूलों के शिक्षक व संचालक
प्रयागराज कोरोना महामारी के चलते लगभग काई महीने से प्राइवेट स्कूलों में ताले बंद हैं उसमे शिक्षण कार्य करने शिक्षकों व कर्मियों के सामने परिवार को चलाने का संकट खड़ा हो गया है सरकार प्राइवेट स्कूलों की मेहनत के कारण शिक्षा में गुणात्मक सुधार व प्रगति का दावा कर अपनी पीठ थपथपाने से नहीं चूकती, लेकिन इन प्राइवेट अध्यापकों के बारे में सरकार मौन है कोरोना महामारी को लेकर पिछले कई महीनों से स्कूल बंद हैं सरकारी स्कूल के शिक्षकों को तो देर सबेर वेतन मिल भी जा रहा है लेकिन निजी स्कूलों के 80फीसद से अधिक शिक्षक वेतन के अभाव में आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं कोरोना महामारी के चलते लगभग काई महीने से प्राइवेट स्कूलों में ताले बंद होने से उसमें शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों व कर्मियों के सामने परिवार को चलाने का संकट खड़ा हो गया है कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन होने से लोग अपने-अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो गए शिक्षा के क्षेत्र में इसका सर्वाधिक असर पड़ा इसी बीच प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को विद्यालय के प्रबंधकों द्वारा वेतन दे पाना असंभव हो गया कुछ ने अपनी परंपरागत कृषि को अपना व्यवसाय बना लिया, कइयों ने नई राह चुनीं और उसी के माध्यम से अपने भविष्य बनाने में लग गए पेश है ऐसे शिक्षकों से मीडिया कर्मी से बातचीत के अंश कोरोना काल के समय से स्कूल कॉलेज बंद चल रहे हैं ऐसे में स्कूल से जो कुछ मिलता था, वह भी बंद हो गया है जब बच्चे स्कूल ही नहीं आ रहे हैं तो मानदेय कैसे मिलेगा इन्हीं सब अव्यवस्थाओं को लेकर शिक्षण कार्य के स्थान पर अब पिता के द्वारा कृषि कार्य में हाथ बटा रहा हूं कोरोना महामारी से भयभीत अभिभावक अपने पाल्यों को स्कूल भेजने में सहमत नही हैं ऐसे में स्कूल बंद हैं प्राइवेट स्कूल में अध्यापन का कार्य मिलने से परिवार का खर्च चल रहा था कोरोना महामारी ने तो हमारी अर्थ व्यवस्था ही चौपट कर दी बेकार हो जाने के बाद अब पाई पाई के मोहताज हो जाना पड़ा पढ़ने-लिखने के बाद शिक्षण कार्य कई वर्षों से करता चला आ रहा हूंअब बेरोजगार हो चुका हूंकोरोना महामारी का असर अभी भी कम होने को नहीं है शैक्षिक सत्र बीतने वाला है, स्कूल खुलने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं