🗳️ बिहार चुनाव 2025: ओवैसी का तीसरा मोर्चा, टूटेगा तेजस्वी यादव का CM बनने का सपना?


🗳️ बिहार चुनाव 2025: ओवैसी का तीसरा मोर्चा, टूटेगा तेजस्वी यादव का CM बनने का सपना?

पटना | UP9 News Desk

बिहार की सियासत एक बार फिर गर्म है। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) ने बड़ा दांव खेला है। ओवैसी ने बिहार में तीसरा मोर्चा बनाने की तैयारी तेज कर दी है, जिससे तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने के सपने पर बड़ा असर पड़ सकता है।

🔥 क्या है ओवैसी का प्लान?

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने साफ कर दिया है कि वे बिहार में सिर्फ मुस्लिम वोटों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दलित, पिछड़े और हाशिए पर पड़े तबकों को एक साथ लाकर नया विकल्प देंगे। इसी रणनीति के तहत वे कई छोटे दलों के साथ गठबंधन की तैयारी में हैं।

📉 तेजस्वी की टेंशन क्यों बढ़ी?

तेजस्वी यादव की पार्टी RJD पर अब तक मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण का भरोसा रहा है। लेकिन 2020 विधानसभा चुनाव में सीमांचल के क्षेत्रों में AIMIM ने 5 सीटें जीतकर RJD की नींव को हिला दिया था। अब अगर तीसरा मोर्चा मजबूत होता है, तो RJD के वोट बैंक में सीधी सेंध लग सकती है।

🧠 किसे होगा फायदा?

विश्लेषकों का मानना है कि अगर विपक्ष बंटता है तो सीधा फायदा NDA को हो सकता है। नीतीश कुमार और बीजेपी पहले ही सामाजिक समीकरण साधने में लगे हैं। अगर ओवैसी और तेजस्वी यादव अलग-अलग लड़ते हैं, तो मुस्लिम वोट बिखर सकते हैं और विपक्ष कमजोर हो सकता है।

📍 सीमांचल बना ‘बैटल ग्राउंड’

किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार जैसे ज़िलों में AIMIM का प्रभाव बढ़ा है। यहां मुस्लिम आबादी अधिक है और पिछले चुनावों में AIMIM ने अच्छा प्रदर्शन किया था। ऐसे में यही क्षेत्र 2025 चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं।


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🗣️ राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार की राजनीति अब त्रिकोणीय होती जा रही है। AIMIM का बढ़ता प्रभाव यह दर्शाता है कि राज्य में अब सिर्फ दो ध्रुवों की लड़ाई नहीं रहेगी। ओवैसी का तीसरा मोर्चा दलित-मुस्लिम गठजोड़ के रूप में उभर सकता है, जिससे बिहार की सियासत की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है।


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📸 सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

सोशल मीडिया पर #TejashwiVsOwaisi और #Bihar2025 ट्रेंड कर रहे हैं। जनता के बीच AIMIM की नई रणनीति और RJD की प्रतिक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कुछ यूजर्स इसे विपक्ष की ताकत में दरार मान रहे हैं, तो कुछ इसे लोकतंत्र के लिए नया विकल्प बता रहे हैं।


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निष्कर्ष:
बिहार चुनाव 2025 में ओवैसी का तीसरा मोर्चा बड़ा फैक्टर बन सकता है। अब देखना होगा कि तेजस्वी यादव AIMIM की इस चुनौती का कैसे सामना करते हैं। क्या वे मुस्लिम वोट बैंक को साथ रख पाएंगे या फिर ओवैसी का करिश्मा इस बार इतिहास रच देगा?


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लेखक: UP9 News टीम
Tags: #BiharElections2025 #Owaisi #TejashwiYadav #AIMIM #ThirdFront #BiharPolitics #UP9News

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