बिना परिवार के समाज की रचना के बारे में सोच पाना असंभव-प्रदीप कुमार

बिना परिवार के समाज की रचना के बारे में सोच पाना असंभव-प्रदीप कुमार

मनुष्य को अपने विकास के लिए समाज की आवश्यकता हुई और इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए समाज की प्रथम इकाई के रूप में परिवार का उदय हुआ | क्योंकि बिना परिवार के समाज की रचना के बारे में सोच पाना असंभव है | परिवार से ही हमारे भीतर सद्गुणों का विकास होता है। व्यक्ति के विकास में उसके परिवार का बहुत बड़ा योगदान होता है। परिवार हमारी शक्ति और आंतरिक ऊर्जा का केंद्र है। उक्त बातें थाना प्रभारी मऊआइमा प्रदीप कुमार ने थाना परिसर में आयोजित वरिष्ठ उप निरीक्षक सच्चिदानंद राय के विदाई समारोह के दौरान कहीं | साथ ही उनके आगे का समय अपने परिवार के साथ खुशहाल बिताने की कामना की | इस दौरान दरोगा सच्चिदानंद राय ने ने सेवा काल के दौरान अपने अनुभव साझा किए और उपस्थित साथियों को काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर उप निरीक्षक जग नारायण, संजय मौर्य,अभय चंद्र,राजेश पांडेय,राम भुवन वर्मा,हेड मोहर्रिर वंश नारायण यादव,राज कुमार समेत सभी पुलिस कर्मी मौजूद रहे |

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