कोरोना के साथ गांव गांव वायरल बुखार का प्रकोप लोगो को किया पस्त
शहजाद खान
प्रयागराज मऊआइमा कोरोना के साथ क्षेत्र में वायरल बुखार लोगों को पस्त किए है गांव-गांव में वायरल बुखार और मलेरिया ने दस्तक दे दी है लगातार बढ़ रहे लोगों के बीच बुखार से पीड़ित लोगों में भय व्याप्त है पीड़ितों का कहना है कि जुकाम और खांसी के साथ ही तेज बुखार होता है चिकित्सकों के यहां भी मरीज की भीड़ लगी हुई है बुखार व मलेरिया का संक्रमण गांव-गांव में पैर पसार रहा है हालात यह है कि हर गांव में दर्जनों ग्रामीण बुखार से पीड़ित बताए जाते हैं सुबह से ही निजी अस्पतालों में मरीजों का तांता लग जाता है।कोरोना संक्रमण के साथ इन दिनों वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है ग्रामीण क्षेत्रों में वायरल बुखार से ग्रसित हैं मजबूरी में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग निजी डाक्टरों के पास जा रहे हैं। सुबह होते ही निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ती है।डॉक्टरों की मानें मौजूदा समय मे कोरोना के साथ वायरल बुखार भी पस्त किए है समय से इलाज मिलने पर 5 से 6 दिन में ठीक हो जाता है लेकिन उपचार में देरी होने से यह टाइफाइड बन जाता है और मरीज को कमजोर बनाता है इससे मरीजों की प्लेटलेट्स भी तेजी के साथ गिरती है कभी-कभी यह जानलेवा भी साबित होता है इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। पूरा देश कोविड-19 के संक्रमण से जूझ रहा है सरकार भरसक प्रयास कर रही है लोगों की जान बचाई जाए वही कोरोना संक्रमण के साथ क्षेत्र में कोविड-19 के साथ वायरल बुखार भी जमकर फैला हुआ है कस्बे से लेकर गांव तक सर्दी जुकाम बुखार ने दस्तक दे दी है घर-घर लोग बुखार के साथ सर्दी खांसी की जद में है मऊ आइमा ब्लॉक सहित अन्य ब्लॉकों के दर्जनों गांव बुखार के संक्रमण से जूझ रहे हैं लोगों का कहना है की कस्बा हो या फिर गांव चारों ओर बुखार के साथ सर्दी जुखाम खांसी ने लगभग हर घर में दस्तक दे दी है एक के बाद एक लोग बुखार के संक्रमण की जद में आ रहे हैं गांव के स्थानीय लोगों का कहना है महीनों से लोग बुखार के संक्रमण से जूझ रहे हैं वही मेडिकल स्टोर में दवाओं की टोटा देखा जा रहा है हमेशा बुखार में प्रयोग होने वाली दवाओं का अकाल पड़ रहा है बुखार में प्रयोग लाई जाने वालीपैरासिटामोल ,डोलो,एंटीबायोटिक डोक्सी कैप्सूल और विटामिन सी की कमी पूरा करने के लिए खायी जाने वाली टेबलेट लिम्सी की कोरोना से संक्रमित या फिर बुखार आ जाने पर चिकित्सकों की ओर से इन दवाओं को लिखकर खाने की सलाह दी जाती है लेकिन मरीजों को दवा खाने में मशक्कत करनी पड़ रही है बताया जा रहा है कि मौसम के बदलते मिजाज से सर्दी जुखाम के लोग परेशान हैं ग्रामीण क्षेत्रो में जिन झोलाछाप डॉक्टरों को कोई पूंछता नही था आज वह धन कमाकर गरीबों को लूटने का कार्य कर रहे हैं,हलांकि ग्रामीण अपना इलाज शहर या सरकारी अस्पतालों में जाना भी नही चाहते लोग किसी तरह ठीक होना चाहते हैं उन्हें लगता है सर्दी जुकाम बुखार के मरीजों की जांच कर कोविड पॉजिटिव न दिखा दिया जाए ग्रामीणों के लिए झोला छाप डॉक्टर किसी भगवान से कम नही हैं कस्बों व चौराहों पर झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानों में मेला लगा रहता है दवा खरीदने में मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है