प्रयागराज भूमाफियाओं ने करोड़ों की सरकारी संपत्ति के साथ नगर पंचायत अध्यक्ष की भूमिधारी जमीन भी बेच दी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर की!
प्रयागराज। मऊआइमा क्षेत्र में बेशकीमती जमीनों को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद भूमाफियाओं पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सरकारी और ग्राम समाज की जमीनों के कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर बिक्री करने के साथ-साथ सरकारी संपत्ति से लगी नगर पंचायत अध्यक्ष की भूमिधारी जमीन को भी फर्जी तरीके से बेच दिया गया
मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। शिकायत और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ लोगों पर सरकारी जमीन के अभिलेखों में कथित कूटरचना कर उसे निजी जमीन के साथ जोड़कर बेचने का आरोप है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 1969 में अब्दुल मन्नान और अब्दुल कय्यूम द्वारा नरजहां से 11 बिस्वा 4 धूर निजी जमीन खरीदे जाने का दावा किया गया था। आरोप है कि इसी जमीन से सटी करीब 55 बिस्वा ग्राम समाज की भूमि के अभिलेखों में कथित हेराफेरी कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और 29 अक्टूबर 2025 को जमीन की बिक्री कर दी गई।
तहसील एवं राजस्व विभाग की जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने की बात सामने आई है। इसके बाद पुलिस ने मुजफ्फर हक उर्फ मुजाहिद, आमिर मुनाफ, मुतीवुर्रहमान और लल्लू सोनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
खास बात यह है कि पूर्व लेखपाल राजकुमार सागर द्वारा भी 14 जनवरी 2025 को ग्राम समाज की जमीन बेचने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद आरोप है कि सरकारी संपत्ति से लगी नगर पंचायत अध्यक्ष की भूमिधारी जमीन को भी कथित तौर पर फर्जी तरीके से बेच दिया गया।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि आरोपियों के खिलाफ पूर्व में आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आती रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जमीनों की कथित हेराफेरी और फर्जी दस्तावेजों के खेल पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित किए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल मुकदमा दर्ज होने तक कार्रवाई सीमित रहेगी, या फिर राजस्व विभाग और प्रशासन सरकारी जमीनों की कथित हेराफेरी की पूरी परत खोलकर जिम्मेदार लोगों पर शिकंजा कसेगा?
करोड़ों की सरकारी संपत्ति से जुड़े इस मामले ने राजस्व अभिलेखों की सुरक्षा और जमीनों की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या कथित भूमाफियाओं पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
नोट: मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
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